(Last Updated On: 25/04/2018)

 

Ek Khat Jiska Mujhe Pata Nahi…!!!

देखो ना आज किस मोड़ पर खड़ा हूँ..!
आगे का रास्ता मुझे नहीं पता
पिछे मुड़ जाना मेरे बस में नहीं..!
सम्झ के परे है ये सब मेरे लिए
एक सवाल हमेशा मुझे सोने नहीं देता.!
की तुमने क्यु नहीं सम्झा?

ये हवाओ का चलना..!
तुम्हे मेहसूस करना.!
रोज़ तुम्हारी रीकोर्डेड आवाज़ को सोते वक़्त सुनना..!
ये सब मुझे सुकून देता है..!

वही तुमसे दुर होकर क्यु अजीब सा लगता है..!
क्यु अंदर से कुछ खलता है..! से
क्यु तुमसे बिचड कर
मरने मरने सा लगता है.. !
तुम्हारे बिन..!

सम्झ नहीं आ रहा क्या हो रहा है मुझे
तुम एक एह्सास हो..!
तुमको मेहसूस करने लगा हूँ
तुमसे जित्ना दुर होने की कोशिश करता हूँ
उतना खुद से दूर हो जाता है..!

अजीब सुनापन है ये.!
घर पर अकेले रहना अकेलापन नहीं है
पर पुरे जहान के होते हुए भी अकेला मेहसूस करता हूँ..!

तुम्हारे लिए क्या करू मै?

क्या करु की तुम्हारी निगाहो में कुछ बन सकु
पर ये एक ऐसा खवाब है जिसको लेकर खुदा भी खुद दुविधा मे है ..!
हर रात काटना..!
घड़ी की वो हर सुई का बढना..!
बहुत डरा जाता है..!

हर रात एक अंत की आस रहती है..!
ताकि रोज़ लडना ना पड़े मुझे इस दर्द से..!

क्या करू.?

तुम्हे जाने देने के अलावा कोई रास्ता नहीं है..
पर सच तो ये है की तुम्हारे बिना सच मे कोई खलिश है हवाओ में..!
सब बोलते है कि तुम्हारे पहले भी ज़िन्दगी थी.!
पर कोई ये नहीं जान्ता था की मेरे पास
जीने का मक्सद नहीं था .!

किसी और की खुशी के लिए कैसे जिया जाता है
तुमसे पता चला..!
खैर जब कुछ बचा ही नहीं तो बात कर के कुछ फायदा तो नहीं है..
फिर भी आखिरी सांस तक सिर्फ़ इन्तेज़ार तुम्हारा है..! सिर्फ़ और सिर तुम्हारा..

Credit:- Mr.Daniel Rodrick

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