(Last Updated On: 10/06/2018)

Jab Insan Dard me ho…!!!

पत्झड़..!!

 

जब इंसान दर्द मे हो तो वो
राहो मे गिरे पत्तो को देख कर भी सहम जाता है..!
हर रिश्ते मे एक ऐसा मुकाम आता है जब उसे
पत्झड़ का सामना करना पड़ता है.!
अदावते, तगाफ़्हुल, रंजिश, दर्द और बहुत कुछ जिस्की उम्मीद नहीं होती..!
रिश्तो मे दरार, तनाव और तक़्लीफ़े..!

jab insan dard me ho

और फिर वो
वक़्त आता है जब पेड़ के पत्ते टूट कर बिखर जाते है
दो लोग अलग हो जाते है..!

एक अपने अहंकार या ना मनाने कि वजह से वही
तन कर खड़ा रहता है..! जैसे एक पेड़ पत्झड़ मे
और एक वो जो टूट चुका होता है
उस पत्ते कि तरह..!

वो पेड़ तो नये पत्तो के साथ नयी दुनिया बसा लेता है..!
लेकिन वो पत्ता वो उस दुनिया से अलग हो जाता है या
खाद हो जाता है, या वहिन ज़मीन मे पड़ा रहता है..!
तनाव और उतार चढ़ाव, मे वो पत्ता जो उस पेड़ कि खुब्सुरती था वो मर चुका होता है और वो पेड़ दूसरे को ढूँढ लेता है ..!

ये ही तो जीवन का सच है
कि पेड़ का सिर्फ़ तना होता है..!
पत्तिया सदेव पराई होती है..!
दुनिया मे कभी रुकना नहीं चाहिए..!
भले हि वो उस पत्ती कि बदनसीबी हो या पेड़ का
खुला मिजाज़ ..!

ये पत्झड़ ..!
के भी कई रंग है..!

Credit:- Mr. Daniel

6 thoughts on “Jab Insan Dard me ho”

  1. What i do not realize is in reality how you’re now not actually much more well-favored than you may be now. You’re so intelligent. You realize therefore significantly when it comes to this matter, made me in my opinion believe it from numerous varied angles. Its like men and women aren’t fascinated except it is something to do with Woman gaga! Your own stuffs great. All the time care for it up!

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